ललित निबंध किसे कहते हैं? (Lalit Nibandh Kise Kahte Hai)

Lalit Nibandh Kise Kahte Haiललित निबंध क्या है? (Lalit Nibandh Kya Hai) | ललित निबंध किसे कहते हैं? | ललित निबंध की विशेषताएं क्या है (Lalit Nibandh Ki Visheshta Kya Hai)

दोस्तों क्या आप भी जानना चाहते हैं कि ललित निबंध कैसे लिखा जाता है? और कविता और कहानियों के माध्यम से अपनी भावनाओं को अपने पाठकों तक पहुंचाना चाहते हैं, तो आज आप बिल्कुल सही लेख पर आए हैं।

ललित निबंध निबंध लिखने का एक माध्यम है, जो बहुत ही लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें लेखक कहानियों के माध्यम से पाठकों को समझाने का प्रयत्न करता है, जिससे पाठकों को ललित निबंध पढ़ने में अत्यधिक आनंद आता है।

इसीलिए बहुत सारे लोग ललित निबंध क्या होता है, इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से ललित निबंध किसे कहते हैं, इसके बारे में बताएंगे, तो आपसे गुजारिश है, कि आप इस आर्टिकल को शुरू से अंत तक ध्यानपूर्वक पढ़िए।

ललित निबंध क्या है? | Lalit Nibandh Kya Hote Hain?

Lalit Nibandh Kise Kahte Hai
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ललित निबंध एक संगठित रूप से लिखें गए छोटे निबंधों को कहते हैं, जिसमें लेखक किसी विषय के बारे में अपने व्यक्तिगत राय या अनुभव को व्यक्त करता हैं। 

यह छोटे निबंध आमतौर पर व्यक्तिगत विषयों जैसे किसी व्यक्ति, स्थान अथवा घटना के बारे में आधारित होते है।

ललित निबंध को कहानी या कविता के रूप में भी लिखा जा सकता है, ललित निबंध को लिखने का मुख्य उद्देश्य पाठक को किसी विषय के बारे में जानकारी देने के साथ साथ उसकी संवेदनशीलता को भी बताना होता है।

ललित निबंध शब्द हिंदी में वस्तुतः मराठी भाषा से आया है, यह निबंध अंग्रेजी के ‘पर्सनल एस्से’ के पर्याय में भी प्रयुक्त होता है, ललित निबंध के अन्य नाम जैसे व्यक्तिव्यंजक निबंध, व्यक्तिवाचक निबंध भी है।

यह निबंध अभिव्यक्ति के श्रेष्ठ माध्यम है, इसमें कोई एक विषय निश्चित नहीं होता है। 

ललित निबंध किसे कहते हैं? (Lalit Nibandh Kise Kahte Hai)

ललित निबंध में व्यक्तिपरकता प्रधान होती है और ललित निबंध में स्वानुभूति और कल्पना का बाहुल्य होता है। ललित निबंधों के बहुत सारे नाम अलग-अलग पंडितों ने अपने ज्ञान के आधार पर दिए हैं।

उदाहरण के लिए, डॉक्टर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने ललित आत्मक निबंध, गंगा प्रसाद द्विवेदी ने इसे व्यक्ति वादक निबंध, तथा डॉक्टर विद्याप्रसाद मिश्र ने ललित निबंध को व्यक्तिव्यंजक निबंध का नाम दिया है।

ललित निबंध को हम सौंदर्य निबंध भी कह सकते हैं, हिंदी साहित्य में इस प्रकार की रचना ललित निबंध के अंतर्गत आती है।

ललित निबंध के लेखक | ललित निबंधकार के नाम

ललित निबंध के संबंध में बहुत सारे लेखकों नें अपनी-अपनी परिभाषा दी है, इनमें से कुछ प्रमुख लेखकों के ललित निबंध की परिभाषा कुछ इस प्रकार है।

डॉक्टर जयनाथ नलिन: 

रमणीक रागात्मक गद्य शैली में शिल्पी की सहज सहानुभूति और निजी चिंतन की विडंबना ही ललित निबंध है।

डॉक्टर विनय मोहन शर्मा: 

व्यक्तिवादी निबंध अंग्रेजी के ‘पर्सनल एस्से’ का हिंदी अनुवाद है, इस निबंध में लेखक अपने सरल शब्दों के माध्यम से सामान्य विषय पर अपने अनुभव को प्रस्तुत करता है।

ललित निबंध की विशेषताएं क्या है | ललित निबंध की विशेषताओं को लिखिए

ललित निबंध अपनी बहुत सारी विशेषताओं के कारण प्रसिद्ध है, इनमें से कुछ प्रमुख विशेषताओं को हमने नीचे दिया है।

कम शब्दों में अधिक बातें बताना: 

ललित निबंध में लेखक बहुत ही कम शब्दों में अपनी बातों को व्यक्त करता है, जिससे वह संक्षिप्त रूप में अपने भाव को प्रस्तुत करता है, जिससे पाठको को ललित निबंध समझने में आसानी होती है और इससे उनके समय की भी बचत होती है।

सरल और सुगम भाषा:

ललित निबंध में भाषा बहुत ही सरल एवं सुगम होती है, जो पाठकों को समझने में मदद करती है। ललित निबंध में शब्दों का चयन बहुत ही विवेकपूर्ण तरीके से होता है, जिससे पाठकों को निबंध का अर्थ और संदेश समझने में आसानी हो।

संरचनात्मक रूप:

ललित निबंध में संरचनात्मक रूप से वाक्यों को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है, जो निबंध को आसानी के साथ समझने में मदद करते हैं। इसके अलावा इन निबंधों में सामान्य वाक्य रचना, विवरण और विचारों की स्पष्टता शामिल होती है।

विषय संबंधी ज्ञान:

ललित निबंध में विषय संबंधी ज्ञान दिया जाता है, जिसमें किसी भी विषय पर पाठकों को कम शब्दों में बताया जाता है, जिससे वह उस विषय को अच्छी तरह से समझ सके और उस पर अपने विचारों को भी रख सकें।

निबंध और ललित निबंध में अंतर | ललित निबंध और निबंध में क्या अंतर होता है? 

जैसा कि निबंध के बारे में बात की जाए तो यह गद्य लेखन की एक विधा होती है, और इस शब्द को किसी विषय के तार्किक और भौतिक विवेचना करने वाले लेखों के लिए भी उपयोग किया जाता है।

वहीं दूसरी ओर ललित निबंध, निबंध का एक प्रकार है; इसका से ऐसे निबंध से है, जिसका भूत पक्ष; भाव पक्ष की तुलना में कम प्रधान होता है; आसान शब्दों में समझा जाए तो निबंध की इस विशेष शैली को ललित निबंध कहा जाता है, इसमें बुद्धि की जगह हृदय को स्पर्श करने की क्षमता दे रखी जाती है।

ललित निबंध के जनक कौन है?

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि मिशल द् मोन्तेन (सन् 1533 – 1592) को ललित निबंध के जनक के तौर पर जाना जाता है।

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध

भीष्म को क्षमा नहीं किया गया

आचार्य द्विवेदी जी ने भविष्य की उस महान शक्ति की ओर संदेश दिया है, जो सभी मनुष्य के कर्मों का लेखा जोखा रखती है और तत्पश्चात उसके स्थान को निश्चित करती है।

आचार्य द्विवेदी जी बुद्धिजीवी के दायित्व का निर्वाह करते हुए यह निष्कर्ष देते हैं, कि देश की दुर्दशा चिंतनीय है, किंतु लोकहित का ध्यान रखने वाला बुद्धिजीवी प्रशासक वर्ग की ओर से उपेक्षा पाता रहता है।

बुद्धिजीवी वर्ग भी अपनी तरफ से देश के भाग्य विधाताओं को कोई ठोस संदेश इसलिए नहीं दे पाता है, क्योकि वह जानता है, कि उसके द्वारा दी गई सीख को कोई भी राजनेता महत्व नहीं देगा।

इस निबंध का मूल विचार बातों ही बातों में भीष्म के संदर्भ से उभरकर सामने आया है, भीष्म बहुत ही ज्ञानी और प्रतापी व्यक्ति थे, अपने प्रतिज्ञा पर अडिग रहने वाले व्यक्ति थे, किंतु वे लोकहित की तरफ ध्यान नहीं दे सके और अपने प्रतिज्ञा का मान रखने के लिए उन्होंने अधर्म का भी साथ दिया।

पितामह भीष्म बहुत अधिक शक्तिशाली थे और उन्होनें अपने माता को वचन दिया था, कि वह अपने पूरे जीवन में विवाह नहीं करेंगे और इसके साथ यह भी प्रतिज्ञा ली थी, कि जो भी व्यक्ति हस्तिनापुर के सिंहासन पर राज करेगा, वह उसके राज्य की हमेशा सुरक्षा करेंगे।

लेकिन बाद में उनकी यह प्रतिज्ञा उनके लिए दुख का कारण बना, जब धृतराष्ट्र के पुत्र दुर्योधन ने अधर्म के साथ पांडवों का हक छीन लिया और पितामह भीष्म अपने कुल में सबसे बड़े और इतनी शक्ति रखने के बावजूद कुछ नहीं कर सके। इसके अलावा भरी सभा में द्रोपदी का चीर हरण किया गया, इन सब घटनाओं के साक्षी पितामह भीष्म भी रहे, लेकिन वह केवल दर्शक की भूमिका निभाते रहें और इन सारी घटनाओं को रोक ना सके।

इसका परिणाम यह निकला, कि भारतीय साहित्य और जीवन में उन्हें वह स्थान नहीं प्राप्त हुआ, जो श्री कृष्ण और परशुराम जी को प्राप्त हुआ। इसका प्रमुख कारण यह था, कि श्री कृष्ण सत्य की तुलना में हित पर बहुत अधिक ध्यान देते थे।

उन्होंने सामूहिक हित को ध्यान में रखा और सच को उसकी तुलना में छोटा करके माना, इन्हीं सब कारणों से उन्हें पूर्णावतार मान लिया गया। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी अपने ललित निबंध के माध्यम से यह संदेश देते हैं, कि महत्व गंभीर और स्वस्थ चिंतन का नहीं बल्कि कर्म का है, कर्म करने वाला हमेशा इतिहास का निर्माता होता है।

इसके विपरीत जो व्यक्ति हमेशा सोचता रहता है, वह अपने जीवन में कभी कुछ नहीं कर पाता है, वह इतिहास के रथ चक्र में फंस जाता है, इतिहास के रथ को केवल वही व्यक्ति चला पाता है, जो सोचता है और गहराई से उस विषय पर आत्मचिंतन करता है।

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निष्कर्ष – ललित निबंध क्या है? (Lalit Nibandh Kya Hai)

इस लेख के माध्यम से हमने आपको बताया, कि ललित निबंध क्या है? (Lalit Nibandh Kya Hai) | ललित निबंध किसे कहते हैं? (Lalit Nibandh Kise Kahte Hai) तथा ललित निबंध को आप कैसे आसानी के साथ लिख सकते हैं?

हमनें इस आर्टिकल में हजारी प्रसाद द्विवेदी की एक ललित निबंध को लिखकर ललित निबंध को लिखने का तरीका भी बताया है, जिसकी सहायता से आप बहुत ही सरल शब्दों में अपनी बातों को अपने पाठकों तक पहुंचा सकते हैं और उनके मन को आनंदित कर सकते हैं।

इसी के साथ उम्मीद करता हूं, आपको यह लेख पढ़कर ललित निबंध के बारे में पूरी जानकारी मिली होगी।

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